नैनीताल जिले में एक वरिष्ठ नागरिक को साइबर अपराधियों ने झांसे में लेकर बड़ा धोखा दिया। आरोपियों ने खुद को महाराष्ट्र साइबर क्राइम विभाग का अधिकारी बताकर पीड़िता को व्हाट्सऐप कॉल पर 12 दिन तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखा। इस दौरान पीड़िता को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाया गया और बैंक खातों की जांच के नाम पर विभिन्न खातों में कुल 1.47 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए STF उत्तराखंड और साइबर क्राइम पुलिस ने जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रैकिंग के आधार पर पुलिस टीम ने दिल्ली के करोलबाग स्थित एक गेस्ट हाउस पर छापा मारकर मोहम्मद सैफ (लखनऊ निवासी) और शकील अंसारी (झारखंड निवासी) को गिरफ्तार किया। इससे पहले हिमाचल प्रदेश से राजेंद्र कुमार को भी पकड़ा जा चुका है। अब तक इस मामले में कुल तीन गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने 9 मोबाइल फोन, 14 सिम कार्ड, 3 चेकबुक, 7 ब्लैंक/हस्ताक्षरित चेक, 4 डेबिट कार्ड, पासपोर्ट और एक कंपनी की मोहर बरामद की है। जांच में सामने आया कि आरोपी देशभर में “डिजिटल अरेस्ट” फ्रॉड कर चुके हैं और ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों के जरिए तुरंत आगे भेज दी जाती थी। गिरोह ने ICICI बैंक समेत कई खातों का उपयोग किया, जिनमें केवल पीड़िता से ही 33 लाख रुपये जमा कराए गए थे।
पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क अलग-अलग राज्यों में सक्रिय है और अब तक उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तराखंड से कई शिकायतें सामने आई हैं। STF लगातार अन्य खातों और संदिग्धों की जानकारी जुटा रही है।
👉 साइबर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध व्हाट्सऐप कॉल या संदेश पर भरोसा न करें, व्यक्तिगत/बैंकिंग जानकारी साझा न करें और किसी भी प्रकार की ठगी की आशंका होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
