चम्पावत, उत्तराखंड। देवभूमि कॉलेज ऑफ एजुकेशन (बनबसा) चम्पावत के B.Ed (शिक्षाशास्त्र) के छात्र-छात्राओं ने द्वितीय सेमेस्टर के हालिया परीक्षा परिणाम पर गंभीर आपत्ति जताई है। कॉलेज सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा से संबद्ध है।
छात्रों का कहना है कि प्रकाशित परिणाम उनकी उम्मीदों के विपरीत है। कुल 35 छात्र-छात्राओं को अनुत्तीर्ण कर दिया गया है, जिनमें से कई को सामान्य विषयों जैसे — स्कूल प्रशासन एवं प्रबंधन, शैक्षिक प्रौद्योगिकी एवं ICT, हिन्दी और संस्कृत — में बेहद कम अंक (24, 25, 26) दिए गए हैं। संस्कृत विषय में तो सभी छात्रों को अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया। कई विद्यार्थियों को 2-3 विषयों में, तो किसी को सभी विषयों में फेल कर दिया गया है।
छात्र-छात्राओं ने पहले महाविद्यालय प्रशासन से संपर्क किया, लेकिन कॉलेज ने उन्हें विश्वविद्यालय जाने को कहा। इसके बाद वे खराब मौसम में अल्मोड़ा स्थित विश्वविद्यालय पहुँचे। छात्रों के अनुसार, वहाँ कुलपति, कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक ने उन्हें Scrutiny (स्क्रूटिनी) का विकल्प अपनाने को कहा और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। लेकिन समय बीतने पर जब उन्होंने फोन पर परिणाम जानना चाहा तो विश्वविद्यालय ने स्क्रूटिनी से ही इंकार कर दिया और कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी बात से पलट गया और बिना कॉपियाँ जांचे ही कह दिया कि सभी का परिणाम जैसा है वैसा ही रहेगा। इससे छात्र न केवल आगामी परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं, बल्कि मानसिक तनाव में भी हैं।
करीब 20 छात्र-छात्राओं का कहना है कि वे सभी 25–27 अंकों से असफल घोषित किए गए हैं, जबकि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों का लगभग समान अंकों से अनुत्तीर्ण होना संदेहास्पद है। उन्होंने पुनर्मूल्यांकन की मांग करते हुए कहा कि अगर विश्वविद्यालय RTI का सहारा लेने को ही कह रहा है, तो यह छात्रों के साथ सीधा अन्याय है।
छात्रों ने मांग की है कि उनकी कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन करवाया जाए और न्यायपूर्ण परिणाम जारी किए जाएँ।
